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मैंरत्नेश्वर के बारे में

मैंरत्नेश्वर 19 कलाओं से युक्त इस श्रृष्टि के प्रथम द्रष्टा रचिक हैं। जंगल में रहने के दौरान 6-7 सितंबर, 2006 को रत्नमुहूर्त में यह स्थितप्रज्ञ की अवस्था में चले गये। वहीं इन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ।

20 अक्टूबर, वर्ष 1966 को मैंरत्नेश्वर का जन्म हुआ। अपने पैत्रिक गाँव बड़हिया में एक किसान के रूप में अपना जीवन शुरू करने वाले मैंरत्नेश्वर को बचपन में ही ब्रह्म से एका स्थापित हो गया था। यह घंटों जंगलों में, नदियों के किनारे और एकांत में बैठकर उसके ध्वनि-ब्रह्म को सुनते-गुनते रतनृत्य में मगन रहते।
श्रीराम से संवाद और अपने गुरुसखा श्रीकृष्ण के साक्षात् दर्शन के बाद इन्होंने मैंकार का सन्देश दिया। इन्होंने हजारों लोगों के जीवन में प्रेमोह के साथ रचनात्मक-सकारात्मक बदलाव लाया है। यह श्रृष्टि के पहले रचनाकार हैं, जिन्होंने स्वदर्शन और ज्ञान प्राप्ति की परम अवस्था का रचित-वर्णन स्वयं किया है।

सर गणेश दत्त पाटलिपुत्र, पटना, बिहार में अपने स्कूल के दिनों से ही, पाँचवीं कक्षा तक वे "कहानी मास्टर" के नाम से जाने जाते थे। चार साल की उम्र में अपने पिता के निधन के बाद, उन्होंने बेहद संघर्षपूर्ण जीवन जिया।

मैंरत्नेश्वर 6 से भी अधिक बेस्टसेलिंग ग्रंथों के द्रष्टा रचनाकार हैं। यह पर्यावरण, ज्ञान-विज्ञान, आदिसंस्कृति, स्वजान और दर्शन पर रचन के लिए लोकप्रिय हैं। इनमें ‘रेखना मेरी जान’ (बेस्टसेलर उपन्यास), ‘एक लड़की पानी पानी’ (उपन्यास), महायुग उपन्यास त्रयी श्रृंखला में ‘32000 साल पहले’, ‘हिमयुग में प्रेम’, ‘पहला सनातन हिन्दू’ (बेस्टसेलर उपन्यास त्रयी) आदि प्रमुख हैं।
इन्हें सूचना और प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा ‘भारतेंदु हरिश्चंद्र पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। 

ईमेल ratneshwar1967@yahoo.co.in

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दर्शन सत्र

1. दर्शन सत्र के साथ सवाल-जवाब (4 या 6 घंटे)
2. 'मैं कथा' के साथ संगीत (1-4 दिन)
3. विन मेडिटेशन - दर्शन ध्यान प्रथाओं के साथ प्रेरक कार्यशाला-(1-3 दिन)

यदि आप चाहते हैं सत्र. संपर्क करें – ratneshwar9@gmail.com

प्रदर्शनी सत्र

1. ''मैं' ग्रंथ प्रदर्शनी, जिसमें 'रचनाकार' का सिद्धांत शामिल है (विश्व की सबसे महंगी पुस्तक) - एक दिवसीय।

यदि आप चाहते हैं सत्र. संपर्क करें – ratneshwar9@gmail.com

आगामी कार्यक्रम

1. ''मैं'' ग्रंथ का अनावरण - सीआरडी पटना पुस्तक मेला - 7.12.2025 अपराह्न 03:00 बजे से 4:45 बजे तक
2. कनिष्का तिवारी द्वारा 'मैं' की कहानी सुनाना - सीआरडी पटना पुस्तक मेला - 7.12.2025 शाम 6:00 बजे से 7:00 बजे तक
3. 'सुर मैंकार' - मैं रत्नेश्वर और सत्येन्द्र संगीत द्वारा - सीआरडी पटना पुस्तक मेला - 12.12.2025 सायं 6:00 बजे से 8:00 बजे तक
4. 'मैं' ग्रंथ प्रदर्शनी - सीआरडी पटना पुस्तक मेला - 07.12.2025 से 16.12.2025

यदि आप चाहते हैं सत्र. संपर्क करें – ratneshwar9@gmail.com